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ऋत्विजं मन्यसे कृष्णमथ वा कुरुनन्दन।
द्वैपायने स्थिते वृद्धे कथं कृष्णोऽर्चितस्त्वया॥ ९॥
अनुवाद
कुरुकुल को सुख पहुँचाने वाले युधिष्ठिर! अथवा यदि यह कहा जाए कि आप कृष्ण को अपना ऋत्विज मानते हैं, तो फिर ऋत्विजों में सबसे वृद्ध द्वैपायन वेदव्यास के समक्ष आपने कृष्ण की आराधना किस प्रकार की?
Yudhishthir who makes Kurukula happy! Or if it is said that you consider Krishna as your Ritvija, then how did you worship Krishna in the presence of Dwaipayana Vedvyas, the oldest among the Ritvijas? 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥