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mahabharat 2.37.6: हे कुरुपंगव! यदि तुम श्रीकृष्ण को बहुत बूढ़ा मानते हो, तो फिर उनका पुत्र पूजा के योग्य कैसे हो सकता है, जबकि उनके पिता तो वृद्ध वसुदेव हैं?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 2.37: शिशुपालके आक्षेपपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 37: शिशुपालके आक्षेपपूर्ण वचन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.37.6 
अथ वा मन्यसे कृष्णं स्थविरं कुरुपुङ्गव।
वसुदेवे स्थिते वृद्धे कथमर्हति तत्सुत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपंगव! यदि तुम श्रीकृष्ण को बहुत बूढ़ा मानते हो, तो फिर उनका पुत्र पूजा के योग्य कैसे हो सकता है, जबकि उनके पिता तो वृद्ध वसुदेव हैं?॥6॥
 
Kurupungava! Or if you consider Sri Krishna to be very old, then how can his son be worthy of worship when his father is the old Vasudeva?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)