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mahabharat 2.37.5: सब लोग जानते हैं कि यदुवंशी कृष्ण राजा नहीं हैं, फिर वे समस्त राजाओं के बीच उस प्रकार पूजे जाने के अधिकारी कैसे हो सकते हैं, जिस प्रकार आपने उनकी पूजा की है?॥5॥   |   mahabharat अध्याय 2.37: शिशुपालके आक्षेपपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 37: शिशुपालके आक्षेपपूर्ण वचन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.37.5 
कथं ह्यराजा दाशार्हो मध्ये सर्वमहीक्षिताम्।
अर्हणामर्हति तथा यथा युष्माभिरर्चित:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सब लोग जानते हैं कि यदुवंशी कृष्ण राजा नहीं हैं, फिर वे समस्त राजाओं के बीच उस प्रकार पूजे जाने के अधिकारी कैसे हो सकते हैं, जिस प्रकार आपने उनकी पूजा की है?॥5॥
 
Everyone knows that the Yaduvanshi Krishna is not a king. Then how can he be entitled to be worshipped among all the kings the way you have worshipped him? ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)