Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.37.29: मधुसूदन! जिस प्रकार किसी नपुंसक से विवाह करना या अंधे को सुन्दर दिखाना उनका उपहास ही है, उसी प्रकार आप जैसे राज्यहीन व्यक्ति को राजा मानकर उसकी पूजा करना भी विडम्बना ही है। | mahabharat अध्याय 2.37: शिशुपालके आक्षेपपूर्ण वचन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्लीबे दारक्रिया यादृगन्धे वा रूपदर्शनम्।
अराज्ञो राजवत् पूजा तथा ते मधुसूदन॥ २९॥
अनुवाद
मधुसूदन! जिस प्रकार किसी नपुंसक से विवाह करना या अंधे को सुन्दर दिखाना उनका उपहास ही है, उसी प्रकार आप जैसे राज्यहीन व्यक्ति को राजा मानकर उसकी पूजा करना भी विडम्बना ही है।
Madhusudan! Just as marrying a eunuch or showing beauty to a blind person is nothing but mockery of them, similarly worshipping a king like a person without a state like you is nothing but irony.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥