Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.37.20: हमने सोचा था कि यदि यह धर्मानुरागी क्षत्रिय सम्राट बनना चाहता है, तो अच्छा है। यही सोचकर हम इसे कर दे रहे हैं, परन्तु यह राजा युधिष्ठिर हमारी बात नहीं सुनता। | mahabharat अध्याय 2.37: शिशुपालके आक्षेपपूर्ण वचन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अस्य धर्मप्रवृत्तस्य पार्थिवत्वं चिकीर्षत:।
करानस्मै प्रयच्छाम: सोऽयमस्मान् न मन्यते॥ २०॥
अनुवाद
हमने सोचा था कि यदि यह धर्मानुरागी क्षत्रिय सम्राट बनना चाहता है, तो अच्छा है। यही सोचकर हम इसे कर दे रहे हैं, परन्तु यह राजा युधिष्ठिर हमारी बात नहीं सुनता।
We had thought that if this Kshatriya who is devoted to religious practices wants to become an emperor, then it is good. Thinking this, we are giving him tax, but this King Yudhishthira does not listen to us.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥