Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.36.7: उनमें से कुछ लोग धर्म और धन के मामलों में बहुत कुशल थे। कुछ लोग व्रतों के बड़े-बड़े पालनकर्ता थे। इस प्रकार वे महात्मा, जो सम्पूर्ण भाष्य के विद्वानों में श्रेष्ठ थे, अच्छी-अच्छी कथाएँ और शिक्षाप्रद बातें कहकर स्वयं भी सुखी रहते थे और दूसरों को भी सुखी बनाते थे। | mahabharat अध्याय 2.36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनमें से कुछ लोग धर्म और धन के मामलों में बहुत कुशल थे। कुछ लोग व्रतों के बड़े-बड़े पालनकर्ता थे। इस प्रकार वे महात्मा, जो सम्पूर्ण भाष्य के विद्वानों में श्रेष्ठ थे, अच्छी-अच्छी कथाएँ और शिक्षाप्रद बातें कहकर स्वयं भी सुखी रहते थे और दूसरों को भी सुखी बनाते थे।
Some of them were very skilled in deciding matters of religion and wealth. Some were great observers of fasts. In this way, those great souls, who were the best among the scholars of complete commentary, used to make themselves happy and also others happy by telling good stories and instructive things. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥