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mahabharat 2.36.5: कुछ विद्वान् लोग शास्त्रविहित नाना प्रकार के तर्कों और युक्तियों द्वारा दुर्बलों को बलवान और बलवानों को दुर्बल सिद्ध करते थे ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 2.36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.36.5 
कृशानर्थांस्तत: केचिदकृशांस्तत्र कुर्वते।
अकृशांश्च कृशांश्चक्रुर्हेतुभि: शास्त्रनिश्चयै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कुछ विद्वान् लोग शास्त्रविहित नाना प्रकार के तर्कों और युक्तियों द्वारा दुर्बलों को बलवान और बलवानों को दुर्बल सिद्ध करते थे ॥5॥
 
Some learned men used to prove the weak points as strong and the strong points as weak by means of various arguments and reasonings prescribed by the scriptures. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)