स उपालभ्य भीष्मं च धर्मराजं च संसदि।
अपाक्षिपद् वासुदेवं चेदिराजो महाबल:॥ ३२॥
अनुवाद
पराक्रमी चेदिराज ने सम्पूर्ण सभा में भीष्म और धर्मराज युधिष्ठिर को फटकारा और भगवान वासुदेव की निन्दा करने लगे।
The mighty King of Chedi rebuked Bhishma and the king of Dharma, Yudhishthira in the presence of the entire assembly and began to criticise Lord Vasudeva. 32.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि अर्घाभिहरणपर्वणि श्रीकृष्णार्घ्यदाने षट्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत अर्घाभिहरणपर्वमें श्रीकृष्णको अर्घ्यदानविषयक छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)