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mahabharat 2.36.31: श्रीकृष्ण ने शास्त्रीय विधि के अनुसार अर्घ्य स्वीकार किया। वासुदेवनन्दन भगवान श्रीहरिकि की वह आराधना राजा शिशुपाल को सहन नहीं हुई। 31॥   |   mahabharat अध्याय 2.36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.36.31 
प्रतिजग्राह तत् कृष्ण: शास्त्रदृष्टेन कर्मणा।
शिशुपालस्तु तां पूजां वासुदेवे न चक्षमे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण ने शास्त्रीय विधि के अनुसार अर्घ्य स्वीकार किया। वासुदेवनन्दन भगवान श्रीहरिकि की वह आराधना राजा शिशुपाल को सहन नहीं हुई। 31॥
 
Shri Krishna accepted the Arghya according to the classical method. King Shishupal could not bear that worship of Vasudevanandan Lord Srihariki. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)