श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.36.27 
वैशम्पायन उवाच
ततो भीष्म: शान्तनवो बुद्धॺा निश्चित्य वीर्यवान्।
अमन्यत तदा कृष्णमर्हणीयतमं भुवि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - तब महाबली शान्तनुनन्दन भीष्म ने अपनी बुद्धि से निश्चय किया कि वे भगवान श्रीकृष्ण को ही संसार में सबसे अधिक पूजनीय मानते हैं ॥27॥
 
Vaishampayanji says - Then the mighty Shantanunandan Bhishma decided with his wisdom that he considered Lord Shri Krishna to be the most worshipable person in the world. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)