श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.36.26 
युधिष्ठिर उवाच
कस्मै भवान् मन्यतेऽर्घ्यमेकस्मै कुरुनन्दन।
उपनीयमानं युक्तं च तन्मे ब्रूहि पितामह॥ २६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे कुरुपुत्र, पितामह! यहाँ एकत्रित हुए इन राजाओं में से आप किसे प्रथम अर्घ्य देना उचित समझते हैं? कृपया मुझे यह बताइए।
 
Yudhishthira asked - O great grandfather, son of Kuru! Among these kings gathered here, to whom do you think it is appropriate to offer arghya first? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)