श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.36.23 
आचार्यमृत्विजं चैव संयुजं च युधिष्ठिर।
स्नातकं च प्रियं प्राहु: षडर्घ्यार्हान् नृपं तथा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
आचार्य, ऋत्विज्, सम्बन्धी, स्नातक, प्रिय मित्र और राजा- ये छह अर्घ्य देकर पूजनीय बताए गए हैं ॥23॥
 
Acharya, Ritvij, relative, graduate, dear friend and king – these six have been declared worthy of worship by offering Arghya. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)