श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.36.22 
ततो भीष्मोऽब्रवीद् राजन् धर्मराजं युधिष्ठिरम्।
क्रियतामर्हणं राज्ञां यथार्हमिति भारत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! तत्पश्चात् भीष्म ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा - 'भरतवंश के रत्न युधिष्ठिर! अब आप यहाँ पधारे हुए राजाओं का यथोचित आतिथ्य करें।'
 
Janamejaya! Thereafter Bhishma said to Dharmaraja Yudhishthira - 'Yudhishthira, the jewel of the Bharat clan! Now you should give due hospitality to the kings who have arrived here.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)