श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.36.19 
अहो बत महद्‍भूतं स्वयंभूर्यदिदं स्वयम्।
आदास्यति पुन: क्षत्रमेवं बलसमन्वितम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'अहा! ये स्वयंभू महाविष्णु ऐसे शक्तिशाली क्षत्रिय समाजों को पुनः उखाड़ फेंकना चाहते हैं।' 19॥
 
'Oh! This self-proclaimed Mahavishnu wants to uproot such powerful Kshatriya communities again. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)