श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.36.18 
यस्य बाहुबलं सेन्द्रा: सुरा: सर्व उपासते।
सोऽयं मानुषवन्नाम हरिरास्तेऽरिमर्दन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'वे ही शत्रुमर्दन श्रीहरि, जिनके बाहुबल से इन्द्र आदि सभी देवता पूजते हैं, यहाँ मनुष्य रूप में विराजमान हैं। 18॥
 
'The same Shatrumardan Shri Hari, whose muscle power all the gods like Indra worship, is sitting here like a human being. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)