vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा
»
श्लोक 18
श्लोक
2.36.18
यस्य बाहुबलं सेन्द्रा: सुरा: सर्व उपासते।
सोऽयं मानुषवन्नाम हरिरास्तेऽरिमर्दन:॥ १८॥
अनुवाद
'वे ही शत्रुमर्दन श्रीहरि, जिनके बाहुबल से इन्द्र आदि सभी देवता पूजते हैं, यहाँ मनुष्य रूप में विराजमान हैं। 18॥
'The same Shatrumardan Shri Hari, whose muscle power all the gods like Indra worship, is sitting here like a human being. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×