श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.36.12 
सस्मार च पुरा वृत्तां कथां तां पुरुषर्षभ।
अंशावतरणे यासौ ब्रह्मणो भवनेऽभवत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! उन्हें ब्रह्मलोक में भगवान् के समस्त अंगों (देवताओं) सहित अवतार लेने के विषय में जो चर्चा हुई थी, उस प्राचीन घटना का स्मरण हो आया॥12॥
 
O best of men! He remembered the ancient incident of the discussion which had taken place in Brahmaloka regarding the incarnation of the Lord along with all his parts (gods).॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)