श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.36.11 
अथ चिन्तां समापेदे स मुनिर्मनुजाधिप।
नारदस्तु तदा पश्यन् सर्वक्षत्रसमागमम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! उस समय वहाँ समस्त क्षत्रियों का समूह देखकर नारद मुनि सहसा चिन्तित हो गए॥11॥
 
Janamejaya! At that time seeing the gathering of all the Kshatriyas there, sage Narada suddenly became worried. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)