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mahabharat 2.36.10: परम बुद्धिमान राजा एवं धन्य धर्मराज युधिष्ठिर के धन, वैभव और यज्ञानुष्ठान को देखकर देवर्षि नारद बहुत प्रसन्न हुए॥10॥   |   mahabharat अध्याय 2.36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 36: राजसूययज्ञमें ब्राह्मणों तथा राजाओंका समागम, श्रीनारदजीके द्वारा श्रीकृष्ण-महिमाका वर्णन और भीष्मजीकी अनुमतिसे श्रीकृष्णकी अग्रपूजा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.36.10 
तां तु लक्ष्मीवतो लक्ष्मीं तदा यज्ञविधानजाम्।
तुतोष नारद: पश्यन् धर्मराजस्य धीमत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान राजा एवं धन्य धर्मराज युधिष्ठिर के धन, वैभव और यज्ञानुष्ठान को देखकर देवर्षि नारद बहुत प्रसन्न हुए॥10॥
 
Devarshi Narad was very happy to see the wealth, splendor and yagya rituals of the most intelligent king and the blessed Dharmaraja Yudhishthira. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)