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mahabharat 2.35.9: समस्त धर्मों के ज्ञाता विदुर जी को धन का प्रबंध करने के लिए नियुक्त किया गया और राजा दुर्योधन को कर देने वाले राजाओं से सब प्रकार के दान स्वीकार करने और उन्हें सुव्यवस्थित रूप से रखने का दायित्व सौंपा गया॥9॥   |   mahabharat अध्याय 2.35: राजसूययज्ञका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 35: राजसूययज्ञका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.35.9 
क्षत्ता व्ययकरस्त्वासीद् विदुर: सर्वधर्मवित्।
दुर्योधनस्त्वर्हणानि प्रतिजग्राह सर्वश:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
समस्त धर्मों के ज्ञाता विदुर जी को धन का प्रबंध करने के लिए नियुक्त किया गया और राजा दुर्योधन को कर देने वाले राजाओं से सब प्रकार के दान स्वीकार करने और उन्हें सुव्यवस्थित रूप से रखने का दायित्व सौंपा गया॥9॥
 
Vidur ji, who was well versed with all the religions, was appointed to manage the wealth and King Duryodhan was responsible for accepting all kinds of gifts from the tax paying kings and keeping them in an orderly manner.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)