Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.35.11: धर्मराज युधिष्ठिर और उनके दरबार को देखने आए समस्त राजाओं में से एक भी ऐसा नहीं था जो एक हजार स्वर्ण मुद्राओं से कम मूल्य का उपहार लाया हो ॥11॥ | mahabharat अध्याय 2.35: राजसूययज्ञका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रष्टुकामा: सभां चैव धर्मराजं युधिष्ठिरम्।
न कश्चिदाहरत् तत्र सहस्रावरमर्हणम्॥ ११॥
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर और उनके दरबार को देखने आए समस्त राजाओं में से एक भी ऐसा नहीं था जो एक हजार स्वर्ण मुद्राओं से कम मूल्य का उपहार लाया हो ॥11॥
Among all the kings who had come to see Dharmaraja Yudhishthira and his court, there was not a single one who brought gifts worth less than a thousand gold coins. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥