Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.34.24-25: वहाँ विश्राम करके पृथ्वी के स्वामी भगवान् ने धर्मराज युधिष्ठिर से भेंट की, जो बहुत-सी दक्षिणा दे रहे थे और बहुत-से अतिथियों से घिरे हुए थे। जनमेजय! उस समय राजाओं, ब्राह्मणों और ऋषियों से परिपूर्ण वह यज्ञ-वेदी देवताओं से भरे हुए स्वर्ग के समान शोभायमान हो रही थी। | mahabharat अध्याय 2.34: युधिष्ठिरके यज्ञमें सब देशके राजाओं, कौरवों तथा यादवोंका आगमन और उन सबके भोजन-विश्राम आदिकी सुव्यवस्था । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ विश्राम करके पृथ्वी के स्वामी भगवान् ने धर्मराज युधिष्ठिर से भेंट की, जो बहुत-सी दक्षिणा दे रहे थे और बहुत-से अतिथियों से घिरे हुए थे। जनमेजय! उस समय राजाओं, ब्राह्मणों और ऋषियों से परिपूर्ण वह यज्ञ-वेदी देवताओं से भरे हुए स्वर्ग के समान शोभायमान हो रही थी।
After resting there, the lord of the earth met Dharmaraja Yudhishthira who was offering a lot of dakshina and was surrounded by many guests. Janamejaya! At that time, that sacrificial altar filled with kings, Brahmins and sages looked as beautiful as a heaven filled with gods. 24-25.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि राजसूयपर्वणि निमन्त्रितराजागमने चतुस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत राजसूयपर्वमें निमन्त्रित राजाओंका आगमनविषयक चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥