श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 34: युधिष्ठिरके यज्ञमें सब देशके राजाओं, कौरवों तथा यादवोंका आगमन और उन सबके भोजन-विश्राम आदिकी सुव्यवस्था  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.34.21 
सर्वत: संवृतानुच्चै: प्राकारै: सुकृतै: सितै:।
सुवर्णजालसंवीतान् मणिकुट्टिमभूषितान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वे भव्य इमारतें चारों ओर से सुंदर, सफ़ेद और ऊँची प्राचीरों से घिरी हुई थीं। वे सोने की झालरों से सजी हुई थीं। उनके आँगन के फर्श बहुमूल्य पत्थरों और रत्नों से जड़े हुए थे। 21.
 
Those magnificent buildings were surrounded on all sides by beautiful, white and tall ramparts. They were decorated with gold fringes. The floors of their courtyards were studded with precious stones and gems. 21.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)