श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 34: युधिष्ठिरके यज्ञमें सब देशके राजाओं, कौरवों तथा यादवोंका आगमन और उन सबके भोजन-विश्राम आदिकी सुव्यवस्था  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.34.1 
वैशम्पायन उवाच
स गत्वा हास्तिनपुरं नकुल: समितिंजय:।
भीष्ममामन्त्रयाञ्चक्रे धृतराष्ट्रं च पाण्डव:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! युद्ध में विजयी पाण्डुकुमार नकुल ने हस्तिनापुर जाकर भीष्म और धृतराष्ट्र को निमंत्रण दिया। 1॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Pandukumar Nakul, victorious in the war, went to Hastinapur and invited Bhishma and Dhritarashtra. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)