Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.33.9: उनके सभी शुभचिंतक मित्र एक साथ इस प्रकार कहने लगे - ‘प्रभु! आपके लिए यज्ञ करने का यही उचित समय है; अतः अब इसे आरम्भ कीजिए।’॥9॥ | mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुहृदश्चैव ये सर्वे पृथक् च सह चाब्रुवन्।
यज्ञकालस्तव विभो क्रियतामत्र साम्प्रतम्॥ ९॥
अनुवाद
उनके सभी शुभचिंतक मित्र एक साथ इस प्रकार कहने लगे - ‘प्रभु! आपके लिए यज्ञ करने का यही उचित समय है; अतः अब इसे आरम्भ कीजिए।’॥9॥
All his well wishing friends started saying this severally and together - 'Prabhu! This is the right time for you to perform the yagya; therefore, commence it now.'॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥