vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना
»
श्लोक 8
श्लोक
2.33.8
स्वकोष्ठस्य परीमाणं कोशस्य च महीपति:।
विज्ञाय राजा कौन्तेयो यज्ञायैव मनो दधे॥ ८॥
अनुवाद
कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिर ने अपने अन्न, वस्त्र और धन के भण्डार की सीमा जानकर यज्ञ करने का निश्चय किया ॥8॥
Kuntinandan King Yudhishthir decided to perform the Yagya after knowing the extent of his store of food, clothes and treasure. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×