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mahabharat 2.33.8: कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिर ने अपने अन्न, वस्त्र और धन के भण्डार की सीमा जानकर यज्ञ करने का निश्चय किया ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.33.8 
स्वकोष्ठस्य परीमाणं कोशस्य च महीपति:।
विज्ञाय राजा कौन्तेयो यज्ञायैव मनो दधे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिर ने अपने अन्न, वस्त्र और धन के भण्डार की सीमा जानकर यज्ञ करने का निश्चय किया ॥8॥
 
Kuntinandan King Yudhishthir decided to perform the Yagya after knowing the extent of his store of food, clothes and treasure. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)