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mahabharat 2.33.53: इस प्रकार स्वर्ग में इन्द्र के समान संसार में अद्वितीय महात्मा पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर का यज्ञ प्रारम्भ हुआ ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.33.53 
प्रावर्ततैवं यज्ञ: स पाण्डवस्य महात्मन:।
पृथिव्यामेकवीरस्य शक्रस्येव त्रिविष्टपे॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार स्वर्ग में इन्द्र के समान संसार में अद्वितीय महात्मा पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर का यज्ञ प्रारम्भ हुआ ॥53॥
 
In this way, the Yagya of Mahatma Pandu Nandan Yudhishthira, who was unique in the world like Indra in heaven, started. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)