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mahabharat 2.33.50: वहाँ बड़े-बड़े ब्राह्मणों का आनन्दपूर्वक भोजन करने और बातें करने का निरन्तर शब्द सुनाई देता था ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.33.50 
भुञ्जतां चैव विप्राणां वदतां च महास्वन:।
अनिशं श्रूयते तत्र मुदितानां महात्मनाम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ बड़े-बड़े ब्राह्मणों का आनन्दपूर्वक भोजन करने और बातें करने का निरन्तर शब्द सुनाई देता था ॥50॥
 
There one could hear the continuous noise of the great Brahmins eating and talking in joy. ॥50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)