श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.33.5 
अवर्षं चातिवर्षं च व्याधिपावकमूर्च्छनम्।
सर्वमेतत् तदा नासीद् धर्मनित्ये युधिष्ठिरे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा युधिष्ठिर के शासनकाल में सूखा, अतिवृष्टि, रोग, अग्नि आदि विपत्तियाँ नहीं आईं।
 
During the reign of the righteous Yudhishthira, there was no occurrence of such calamities as drought, excessive rain, diseases, fire etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)