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mahabharat 2.33.49: हे राजन! राजा द्वारा सम्मानित होकर वे ब्राह्मण उन घरों में रहने लगे। वहाँ वे नाना प्रकार की कथाएँ सुनाते और अभिनेताओं तथा नर्तकों के नाटक देखते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.33.49 
तेषु ते न्यवसन् राजन् ब्राह्मणा नृपसत्कृता:।
कथयन्त: कथा बह्वी: पश्यन्तो नटनर्तकान्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! राजा द्वारा सम्मानित होकर वे ब्राह्मण उन घरों में रहने लगे। वहाँ वे नाना प्रकार की कथाएँ सुनाते और अभिनेताओं तथा नर्तकों के नाटक देखते थे।
 
O King! After being honoured by the king, those Brahmins started living in those houses. There they used to narrate various kinds of stories and watch the performances of actors and dancers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)