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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना
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श्लोक 46-47h
श्लोक
2.33.46-47h
आजग्मुर्ब्राह्मणास्तत्र विषयेभ्यस्ततस्तत:॥ ४६॥
सर्वविद्यासु निष्णाता वेदवेदाङ्गपारगा:।
अनुवाद
तत्पश्चात् वहाँ भिन्न-भिन्न देशों से ब्राह्मण आये, जो समस्त विद्याओं में निपुण तथा वेद-वेदांगों के पारंगत विद्वान थे । 46 1/2॥
After that, Brahmins came there from different countries, who were experts in all the sciences and were expert scholars of Vedas and Vedangas. 46 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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