श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.33.44 
दीक्षित: स तु धर्मात्मा धर्मराजो युधिष्ठिर:।
जगाम यज्ञायतनं वृतो विप्रै: सहस्रश:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ की दीक्षा लेकर पुण्यात्मा धर्मराज युधिष्ठिर हजारों ब्राह्मणों से घिरे हुए यज्ञ मंडप में गए।
 
After taking initiation in performing yajna, the virtuous Dharmaraja Yudhishthira went to the yajna pavilion surrounded by thousands of brahmins. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)