Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.33.39-40: तदनन्तर, युवराज और श्रेष्ठ धर्मज्ञ राजा युधिष्ठिर ने तत्काल मंत्री सहदेव को आदेश दिया कि ‘तुरंत दूत भेजकर समस्त राजाओं और ब्राह्मणों को आमंत्रित करो।’ राजा की यह बात सुनकर सहदेव ने दूत भेजकर कहा- 39-40॥ | mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत आज्ञापयामास स राजा राजसत्तम:।
सहदेवं तदा सद्यो मन्त्रिणं पुरुषर्षभ:॥ ३९॥
आमन्त्रणार्थं दूतांस्त्वं प्रेषयस्वाशुगान् द्रुतम्।
उपश्रुत्य वचो राज्ञ: स दूतान् प्राहिणोत् तदा॥ ४०॥
अनुवाद
तदनन्तर, युवराज और श्रेष्ठ धर्मज्ञ राजा युधिष्ठिर ने तत्काल मंत्री सहदेव को आदेश दिया कि ‘तुरंत दूत भेजकर समस्त राजाओं और ब्राह्मणों को आमंत्रित करो।’ राजा की यह बात सुनकर सहदेव ने दूत भेजकर कहा- 39-40॥
Thereafter, King Yudhishthir, the king's crown prince and the best religious king, immediately ordered minister Sahadev, 'Send messengers immediately to invite all the kings and brahmins.' Hearing this from the king, Sahadev sent messengers and said - 39-40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥