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mahabharat 2.33.38: उस स्थान पर राजा की आज्ञा से शिल्पियों ने भगवान के मंदिर के समान विशाल एवं सुगंधित भवन बनाए ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.33.38 
तत्र चक्रुरनुज्ञाता: शरणान्युत शिल्पिन:।
गन्धवन्ति विशालानि वेश्मानीव दिवौकसाम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उस स्थान पर राजा की आज्ञा से शिल्पियों ने भगवान के मंदिर के समान विशाल एवं सुगंधित भवन बनाए ॥38॥
 
At that place, on the orders of the king, the craftsmen built huge and fragrant buildings like temples of God. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)