Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.33.37: उन सबने पुण्याहवचन किया और उस अनुष्ठानका व्रत लिया (अर्थात् ‘राजसूयेन यक्ष्ये, स्वराज्यं वाप्नानि’ - मैं स्वराज्य प्राप्त करूँगा, इस हेतु राजसूयज्ञ करूँगा आदि) और शास्त्रविधिके अनुसार उस महान यज्ञस्थानकी पूजा करनेका संकल्प किया ॥37॥ | mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते वाचयित्वा पुण्याहमूहयित्वा च तं विधिम्।
शास्त्रोक्तं पूजयामासुस्तद् देवयजनं महत्॥ ३७॥
अनुवाद
उन सबने पुण्याहवचन किया और उस अनुष्ठानका व्रत लिया (अर्थात् ‘राजसूयेन यक्ष्ये, स्वराज्यं वाप्नानि’ - मैं स्वराज्य प्राप्त करूँगा, इस हेतु राजसूयज्ञ करूँगा आदि) और शास्त्रविधिके अनुसार उस महान यज्ञस्थानकी पूजा करनेका संकल्प किया ॥37॥
All of them made the punyahvachan and took the vow of that ritual (i.e. 'Rajasuyen yakshye, swarajyam vapnavani' - I will attain self-rule, for this purpose I will perform Rajsuyajna, etc.) and made a resolution to worship that great yagya place as per the scriptures. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥