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mahabharat 2.33.32: धर्मराज युधिष्ठिर के बोलते ही योद्धाओं में श्रेष्ठ सहदेव ने उनसे कहा, 'सारी व्यवस्था हो चुकी है।'   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.33.32 
तद्वाक्यसमकालं च कृतं सर्वं न्यवेदयत्।
सहदेवो युधां श्रेष्ठो धर्मराजे युधिष्ठिरे॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर के बोलते ही योद्धाओं में श्रेष्ठ सहदेव ने उनसे कहा, 'सारी व्यवस्था हो चुकी है।'
 
As soon as Dharmaraja Yudhishthira finished speaking, Sahadeva, the best of warriors, said to him, 'All the arrangements have been made.' 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)