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mahabharat 2.33.28-29: 'इस यज्ञ के लिए आपके सेवक जाकर समस्त हवन सामग्री, आवश्यक उपकरण, सब प्रकार की शुभ वस्तुएं तथा धौम्यजी द्वारा बताई गई हवन सामग्री भी, जैसे ही मिल जाए, एक-एक करके ले आएं।॥ 28-29॥   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  2.33.28-29 
अस्मिन् क्रतौ यथोक्तानि यज्ञाङ्गानि द्विजातिभि:।
तथोपकरणं सर्वं मङ्गलानि च सर्वश:॥ २८॥
अधियज्ञांश्च सम्भारान् धौम्योक्तान् क्षिप्रमेव हि।
समानयन्तु पुरुषा यथायोगं यथाक्रमम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'इस यज्ञ के लिए आपके सेवक जाकर समस्त हवन सामग्री, आवश्यक उपकरण, सब प्रकार की शुभ वस्तुएं तथा धौम्यजी द्वारा बताई गई हवन सामग्री भी, जैसे ही मिल जाए, एक-एक करके ले आएं।॥ 28-29॥
 
'For this yajna, your servants should go and bring all the sacrificial materials, necessary equipment, all kinds of auspicious items as well as the sacrificial materials mentioned by Dhoumyaji, one by one, as soon as they are found.॥ 28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)