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mahabharat 2.33.27: उस समय शत्रुओं का संहार करने वाले पाण्डुपुत्र भगवान ने योद्धाओं में श्रेष्ठ सहदेव तथा समस्त मन्त्रियों को आज्ञा दी।   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.33.27 
ततस्त्वाज्ञापयामास पाण्डवोऽरिनिबर्हण:।
सहदेवं युधां श्रेष्ठं मन्त्रिणश्चैव सर्वश:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस समय शत्रुओं का संहार करने वाले पाण्डुपुत्र भगवान ने योद्धाओं में श्रेष्ठ सहदेव तथा समस्त मन्त्रियों को आज्ञा दी।
 
At that time, the son of Pandu, the slayer of enemies, gave orders to Sahadeva, the best of warriors, and to all the ministers. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)