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mahabharat 2.33.25: युधिष्ठिर बोले, "श्रीकृष्ण! मेरी मनोकामना पूर्ण हो गई, मेरी सफलता निश्चित है, क्योंकि हृषीकेश! आप मेरी इच्छानुसार स्वयं यहाँ पधारे हैं।"   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.33.25 
युधिष्ठिर उवाच
सफल: कृष्ण संकल्प: सिद्धिश्च नियता मम।
यस्य मे त्वं हृषीकेश यथेप्सितमुपस्थित:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "श्रीकृष्ण! मेरी मनोकामना पूर्ण हो गई, मेरी सफलता निश्चित है, क्योंकि हृषीकेश! आप मेरी इच्छानुसार स्वयं यहाँ पधारे हैं।"
 
Yudhishthira said, "Shri Krishna, my wish has been fulfilled, my success is certain, because Hrishikesh! You have yourself come here as per my wish." 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)