श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.33.20 
तदहं यष्टुमिच्छामि दाशार्ह सहितस्त्वया।
अनुजैश्च महाबाहो तन्मानुज्ञातुमर्हसि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु दशरथ! अब मैं आपके और अपने छोटे भाइयों के साथ यज्ञ करना चाहता हूँ। कृपया मुझे इसकी अनुमति दें।
 
Mahabahu Dasharha! Now I want to perform a yajna with you and my younger brothers. Please give me permission for this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)