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mahabharat 2.33.19: हे देवकीनन्दन माधव! मैं उस समस्त धन को उत्तम ब्राह्मणों के लिए तथा हव्यवाहन अग्नि के लिए उचित रीति से उपयोग करना चाहता हूँ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.33.19 
सोऽहमिच्छामि तत् सर्वं विधिवद् देवकीसुत।
उपयोक्तुं द्विजाग्रॺेभ्यो हव्यवाहे च माधव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे देवकीनन्दन माधव! मैं उस समस्त धन को उत्तम ब्राह्मणों के लिए तथा हव्यवाहन अग्नि के लिए उचित रीति से उपयोग करना चाहता हूँ॥19॥
 
Devakinandan Madhava! I want to use all that wealth in a proper manner for the best Brahmins and for the Havyavahaan fire.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)