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युधिष्ठिर उवाच
त्वत्कृते पृथिवी सर्वा मद्वशे कृष्ण वर्तते।
धनं च बहु वार्ष्णेय त्वत्प्रसादादुपार्जितम्॥ १८॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा- श्री कृष्ण! आपकी कृपा से सारा जगत आपकी सेवा के लिए मेरे अधीन हो गया है। वार्ष्णेय! मैंने बहुत-सा धन भी अर्जित कर लिया है॥ 18॥
Yudhishthira said- Shri Krishna! Due to your kindness, the whole world has come under my control for your service. Varshneya! I have also acquired a lot of wealth.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥