Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.33.18: युधिष्ठिर ने कहा- श्री कृष्ण! आपकी कृपा से सारा जगत आपकी सेवा के लिए मेरे अधीन हो गया है। वार्ष्णेय! मैंने बहुत-सा धन भी अर्जित कर लिया है॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.33.18 
युधिष्ठिर उवाच
त्वत्कृते पृथिवी सर्वा मद्वशे कृष्ण वर्तते।
धनं च बहु वार्ष्णेय त्वत्प्रसादादुपार्जितम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा- श्री कृष्ण! आपकी कृपा से सारा जगत आपकी सेवा के लिए मेरे अधीन हो गया है। वार्ष्णेय! मैंने बहुत-सा धन भी अर्जित कर लिया है॥ 18॥
 
Yudhishthira said- Shri Krishna! Due to your kindness, the whole world has come under my control for your service. Varshneya! I have also acquired a lot of wealth.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)