Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.33.1: धर्मराज युधिष्ठिर प्रजा की रक्षा, सत्य का पालन और शत्रुओं का संहार करते थे। उनके इन कार्यों से प्रसन्न और उत्साहित होकर समस्त प्रजा अपने-अपने वर्ण और श्रम के अनुसार अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करने में तत्पर रहती थी॥ 1॥ | mahabharat अध्याय 2.33: युधिष्ठिरके शासनकी विशेषता, श्रीकृष्णकी आज्ञासे युधिष्ठिरका राजसूययज्ञकी दीक्षा लेना तथा राजाओं, ब्राह्मणों एवं सगे-सम्बन्धियोंको बुलानेके लिये निमन्त्रण भेजना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मराज युधिष्ठिर प्रजा की रक्षा, सत्य का पालन और शत्रुओं का संहार करते थे। उनके इन कार्यों से प्रसन्न और उत्साहित होकर समस्त प्रजा अपने-अपने वर्ण और श्रम के अनुसार अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करने में तत्पर रहती थी॥ 1॥
Dharmaraj Yudhishthira used to protect the people, uphold the truth and kill the enemies. Being relieved and encouraged by these activities of his, all the people used to remain engaged in performing their duties as per their respective Varnas and Shrams.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥