श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 32: नकुलके द्वारा पश्चिम दिशाकी विजय  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  2.32.9-10 
सिन्धुकूलाश्रिता ये च ग्रामणीया महाबला:॥ ९॥
शूद्राभीरगणाश्चैव ये चाश्रित्य सरस्वतीम्।
वर्तयन्ति च ये मत्स्यैर्ये च पर्वतवासिन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
समुद्रतट पर रहने वाले पराक्रमी ग्रामणीय क्षत्रिय, सरस्वती नदी के तट पर रहने वाले शूद्र अहीर, मछली पकड़कर जीविका चलाने वाले धीवर जाति के लोग तथा पर्वतों पर रहने वाले अन्य मनुष्य - इन सबको नकुल ने जीतकर अपने अधीन कर लिया॥9-10॥
 
The mighty Gramaniya Kshatriyas (descendants of village rulers) living on the seashore, the Shudra Ahirs living on the banks of the river Saraswati, the Dhivar caste people who made a living from fishing and the other humans living on the mountains, were all conquered by Nakula and brought them under his control.॥ 9-10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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