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श्लोक 2.32.20  |
एवं विजित्य नकुलो दिशं वरुणपालिताम्।
प्रतीचीं वासुदेवेन निर्जितां भरतर्षभ॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार नकुल वरुणपालित की पश्चिम दिशा को जीतकर इन्द्रप्रस्थ लौट आये, जिसे भगवान वसुदेव ने अपने अधीन कर लिया ॥20॥ |
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| Bharatshrestha! In this way, Nakul returned to Indraprastha after conquering the western direction of Varunapalita, which was taken under his control by Lord Vasudev. 20॥ |
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इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि दिग्विजयपर्वणि नकुलप्रतीचीविजये द्वात्रिंशोऽध्याय:॥ ३२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत दिग्विजयपर्वमें नकुलके द्वारा पश्चिम दिशाकी विजयसे सम्बन्ध रखनेवाला बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३२॥
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