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mahabharat 2.32.16-17: तत्पश्चात् समुद्र द्वीप में रहने वाले अत्यंत भयंकर म्लेच्छों, पहलवों, बर्बरों, किरातों, यवनों और शकों को जीतकर उनसे रत्नों का दान लेकर वह कौरवों में श्रेष्ठ नकुल के पास, जो विजय के विचित्र उपाय जानने वाला था, इन्द्रप्रस्थ लौट आया ॥16-17॥   |   mahabharat अध्याय 2.32: नकुलके द्वारा पश्चिम दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 32: नकुलके द्वारा पश्चिम दिशाकी विजय  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  2.32.16-17 
तत: सागरकुक्षिस्थान् म्लेच्छान् परमदारुणान्॥ १६॥
पह्लवान् बर्बरांश्चैव किरातान् यवनाञ्छकान्।
ततो रत्नान्युपादाय वशे कृत्वा च पार्थिवान्।
न्यवर्तत कुरुश्रेष्ठो नकुलश्चित्रमार्गवित्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समुद्र द्वीप में रहने वाले अत्यंत भयंकर म्लेच्छों, पहलवों, बर्बरों, किरातों, यवनों और शकों को जीतकर उनसे रत्नों का दान लेकर वह कौरवों में श्रेष्ठ नकुल के पास, जो विजय के विचित्र उपाय जानने वाला था, इन्द्रप्रस्थ लौट आया ॥16-17॥
 
Thereafter, after conquering the extremely fierce Mlechhas, Pahlavas, Barbaras, Kirats, Yavanas and Shakas who lived in the sea islands, he took gifts of gems from them and returned to Indraprastha, the best of Kurus, Nakul, who knew the strange ways of victory. 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)