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mahabharat 2.32.14-15h: राजन्! उन्होंने प्रेम के कारण ही नकुल का राज्य स्वीकार किया था। इसके बाद शाकल देश को जीतकर शक्तिशाली नकुल ने मद्र देश की राजधानी में प्रवेश किया और वहाँ के शासक अपने मामा शल्य को प्रेम के बल पर ही वश में कर लिया। ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 2.32: नकुलके द्वारा पश्चिम दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 32: नकुलके द्वारा पश्चिम दिशाकी विजय  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  2.32.14-15h 
स चास्य गतभी राजन् प्रतिजग्राह शासनम्।
तत: शाकलमभ्येत्य मद्राणां पुटभेदनम्॥ १४॥
मातुलं प्रीतिपूर्वेण शल्यं चक्रे वशे बली।
 
 
अनुवाद
राजन्! उन्होंने प्रेम के कारण ही नकुल का राज्य स्वीकार किया था। इसके बाद शाकल देश को जीतकर शक्तिशाली नकुल ने मद्र देश की राजधानी में प्रवेश किया और वहाँ के शासक अपने मामा शल्य को प्रेम के बल पर ही वश में कर लिया। ॥14 1/2॥
 
King! He accepted Nakula's rule only because of love. After this, after conquering Shakal country, the powerful Nakula entered the capital of Madra country and subdued its ruler, his maternal uncle Shalya, only by love. ॥ 14 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)