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mahabharat 2.31.d92-d94: इस प्रकार उन सभी रत्नों को अपने साथ लेकर घटोत्कचन राक्षसों के साथ लंका से सहदेव के शिविर की ओर चल पड़ा और समुद्र पार करके वे सभी पांडव पुत्र सहदेव के पास पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d92-d94
 
 
श्लोक  2.31.d92-d94 
रत्नान्यादाय सर्वाणि प्रतस्थे स घटोत्कच:॥
ततो रत्नान्युपादाय हैडिम्बो राक्षसै: सह।
जगाम तूर्णं लङ्काया: सहदेवपदं प्रति॥
आसेदु: पाण्डवं सर्वे लङ्घयित्वा महोदधिम्॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उन सभी रत्नों को अपने साथ लेकर घटोत्कचन राक्षसों के साथ लंका से सहदेव के शिविर की ओर चल पड़ा और समुद्र पार करके वे सभी पांडव पुत्र सहदेव के पास पहुँचे।
 
Thus, taking all those gems with him, Ghatotkachana along with the demons left Lanka for Sahadev's camp and after crossing the ocean all of them reached near Pandava's son Sahadev.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)