श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d85
 
 
श्लोक  2.31.d85 
यज्ञस्य तोरणे युक्तान् ददौ तालांश्चतुर्दश।
रुक्मपङ्कजपुष्पाणि शिबिका मणिभूषिता:॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ के द्वार पर रखने के लिए चौदह हथेलियाँ प्रदान कीं। साथ ही स्वर्ण कमल पुष्प और रत्नजटित कुण्डल भी दिए।
 
Provided fourteen palms to be placed at the gate of Yagya. Also given golden lotus flowers and jeweled earrings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)