श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d80
 
 
श्लोक  2.31.d80 
वैशम्पायन उवाच
तेन तद् भाषितं श्रुत्वा राक्षसेन्द्रो विभीषण:।
प्रीतिमानभवद् राजन् धर्मात्मा सचिवै: सह॥)
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! घटोत्कच की बात सुनकर धर्मात्मा राक्षस राजा विभीषण और उसके मंत्री बहुत प्रसन्न हुए।
 
Vaishmpayana says- Janamejaya! On hearing Ghatotkacha's words, the righteous demon king Vibhishana and his ministers became very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)