श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  2.31.d8 
आससाद च माद्रेयं पुलस्त्यं रावणो यथा।
अभिवाद्य ततो राजन् सहदेवं घटोत्कच:॥
प्रह्व: कृताञ्जलिस्तस्थौ किं कार्यमिति चाब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
घटोत्कच मद्रिनादन सहदेव के पास इस प्रकार आया, मानो रावण महर्षि पुलस्त्य के पास आया हो। महाराज! तत्पश्चात घटोत्कच ने सहदेव को प्रणाम किया और हाथ जोड़कर नम्रतापूर्वक उनके समक्ष खड़ा होकर बोला- 'मेरे लिए क्या आदेश है?'
 
Ghatotkach came to Madrinadan Sahadeva as if Ravana had made a visit to Maharishi Pulastya. Maharaj! Thereafter Ghatotkach bowed to Sahadeva and stood before him with folded hands humbly and said- 'What is your order for me?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)